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श्लोक 6.101.39  |
स नीलमिव जीमूतं तोयपूर्णं नभस्तलात्।
उत्पपात गृहीत्वा तु हनूमान् शिखरं गिरे:॥ ३९॥ |
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| अनुवाद |
| जल से भरे हुए नीले बादल के समान हनुमान्जी उस पर्वत शिखर को उठाकर ऊपर उछल पड़े॥39॥ |
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| Like a blue cloud filled with water, Hanuman ji jumped up carrying that mountain peak. 39॥ |
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