श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.101.39 
स नीलमिव जीमूतं तोयपूर्णं नभस्तलात्।
उत्पपात गृहीत्वा तु हनूमान् शिखरं गिरे:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जल से भरे हुए नीले बादल के समान हनुमान्‌जी उस पर्वत शिखर को उठाकर ऊपर उछल पड़े॥39॥
 
Like a blue cloud filled with water, Hanuman ji jumped up carrying that mountain peak. 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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