श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 101: श्रीराम का विलाप तथा हनुमान्जी की लायी हुर्इ ओषधि के सुषेण द्वारा किये गये प्रयोग से लक्ष्मण का सचेत हो उठना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.101.35 
अस्मिंस्तु शिखरे जातामोषधीं तां सुखावहाम्।
प्रतर्केणावगच्छामि सुषेणो ह्येवमब्रवीत्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
मैं मानता हूं कि इसी शिखर पर सुखदायक औषधि बढ़ रही होगी, क्योंकि सुषेण ने ऐसा कहा था।
 
It is on this very peak that I presume that the soothing medicine must be growing, because Sushen had said so.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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