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श्लोक  6.100.40 
स ददर्श ततो राम: शक्त्या भिन्नं महाहवे।
लक्ष्मणं रुधिरादिग्धं सपन्नगमिवाचलम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, श्री राम ने उस महायुद्ध में शक्ति से घायल हुए लक्ष्मण की ओर देखा। वे रक्त से लथपथ पड़े थे और सर्पों से भरे पर्वत के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
Thereafter, Shri Ram looked at Lakshman who was pierced by Shakti in that great battle. He was lying soaked in blood and looked like a mountain infested with snakes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)