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ramayan 6.100.37: महाबली रघुनाथजी पास ही खड़े थे। लक्ष्मण को इस दशा में देखकर उन्हें भाई-प्रेम से बड़ा दुःख हुआ।   |   ramayan सर्ग 6.100: राम और रावण का युद्ध, रावण की शक्ति से लक्ष्मण का मूर्च्छित होना तथा रावण का युद्ध से भागना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.100.37 
तदवस्थं समीपस्थो लक्ष्मणं प्रेक्ष्य राघव:।
भ्रातृस्नेहान्महातेजा विषण्णहृदयोऽभवत्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
महाबली रघुनाथजी पास ही खड़े थे। लक्ष्मण को इस दशा में देखकर उन्हें भाई-प्रेम से बड़ा दुःख हुआ।
 
The mighty Raghunathji was standing nearby. Seeing Lakshman in this condition, he was deeply saddened by the brotherly love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)