श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 100: राम और रावण का युद्ध, रावण की शक्ति से लक्ष्मण का मूर्च्छित होना तथा रावण का युद्ध से भागना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.100.15 
सारथेश्चापि बाणेन शिरो ज्वलितकुण्डलम्।
जहार लक्ष्मण: श्रीमान् नैर्ऋतस्य महाबल:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद महाबली लक्ष्मण ने एक ही बाण से उस राक्षस के सारथि का सिर काट डाला, जो चमकते हुए कुण्डलों से सुशोभित था।
 
After this, the mighty Lakshmana cut off with a single arrow the head of the charioteer of that demon, which was adorned with glittering earrings. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)