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ramayan 6.10.14: हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले राजन! जब से विदेहपुत्री सीता यहाँ आई हैं, तब से हम लोग अनेक प्रकार के अशुभ शकुन देख रहे हैं॥ 14॥   |   ramayan सर्ग 6.10: विभीषण का रावण के महल में जाना, उसे अपशकुनों का भय दिखाकर सीता को लौटा देने के लिये प्रार्थना करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 10: विभीषण का रावण के महल में जाना, उसे अपशकुनों का भय दिखाकर सीता को लौटा देने के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.10.14 
यदाप्रभृति वैदेही सम्प्राप्तेह परंतप।
तदाप्रभृति दृश्यन्ते निमित्तान्यशुभानि न:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले राजन! जब से विदेहपुत्री सीता यहाँ आई हैं, तब से हम लोग अनेक प्रकार के अशुभ शकुन देख रहे हैं॥ 14॥
 
O King, who torments the enemies! Ever since Videha's daughter Sita has come here, we have been seeing many kinds of inauspicious omens.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)