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श्लोक 6.1.19  |
इत्युक्त्वा शोकसम्भ्रान्तो राम: शत्रुनिबर्हण:।
हनूमन्तं महाबाहुस्ततो ध्यानमुपागमत्॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| हनुमान् से ऐसा कहकर शत्रुघ्न के रक्षक, बलवान एवं पराक्रमी श्री रामजी शोक से व्याकुल हो गए और बड़ी चिंता में पड़ गए॥19॥ |
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| Having said this to Hanuman, the powerful and powerful Sri Rama, the protector of Shatrughan, became grief-stricken and was deeply worried. ॥19॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे प्रथम: सर्ग:॥ १॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें पहला सर्ग पूरा हुआ॥ १॥ |
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