श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान जी की प्रशंसा करके श्रीराम का उन्हें हृदय से लगाना और समुद्र को पार करने के लिये चिन्तित होना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.1.18 
यद्यप्येष तु वृत्तान्तो वैदेह्या गदितो मम।
समुद्रपारगमने हरीणां किमिवोत्तरम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मेरी सीता ने भी यही शंका की है, जिसकी कथा अभी मुझे सुनाई गई है। इन वानरों के समुद्र पार करने के विषय में जो प्रश्न उठा है, उसका वास्तविक उत्तर क्या है?॥18॥
 
‘My Sita also raised the same doubt, the story of which has just been told to me. What is the real answer to the question that has arisen regarding these monkeys crossing the ocean?’॥ 18॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd