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श्लोक 6.1.18  |
यद्यप्येष तु वृत्तान्तो वैदेह्या गदितो मम।
समुद्रपारगमने हरीणां किमिवोत्तरम्॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| मेरी सीता ने भी यही शंका की है, जिसकी कथा अभी मुझे सुनाई गई है। इन वानरों के समुद्र पार करने के विषय में जो प्रश्न उठा है, उसका वास्तविक उत्तर क्या है?॥18॥ |
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| ‘My Sita also raised the same doubt, the story of which has just been told to me. What is the real answer to the question that has arisen regarding these monkeys crossing the ocean?’॥ 18॥ |
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