श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान जी की प्रशंसा करके श्रीराम का उन्हें हृदय से लगाना और समुद्र को पार करने के लिये चिन्तित होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.1.17 
कथं नाम समुद्रस्य दुष्पारस्य महाम्भस:।
हरयो दक्षिणं पारं गमिष्यन्ति समागता:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इतने विशाल जलराशि से भरे हुए समुद्र को पार करना बड़ा कठिन कार्य है। यहाँ एकत्रित ये वानर समुद्र के दक्षिणी तट तक कैसे पहुँचेंगे?॥17॥
 
‘Crossing an ocean filled with such a vast mass of water is a very difficult task. How will these monkeys gathered here reach the southern shore of the ocean?॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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