श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान जी की प्रशंसा करके श्रीराम का उन्हें हृदय से लगाना और समुद्र को पार करने के लिये चिन्तित होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.1.10 
तन्नियोगे नियुक्तेन कृतं कृत्यं हनूमता।
न चात्मा लघुतां नीत: सुग्रीवश्चापि तोषित:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हनुमानजी ने अपने स्वामी का एक कार्य सौंपकर उसके साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी पूरे किए, अपना अभिमान कम नहीं होने दिया, दूसरों की दृष्टि में अपने को छोटा नहीं होने दिया और सुग्रीव को भी पूर्णतः संतुष्ट किया॥10॥
 
Hanuman, having been assigned to one task of his master, completed other important tasks along with it, did not let his pride diminish, did not allow himself to be belittled in the eyes of others and also satisfied Sugreeva completely.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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