श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 9: हनुमान जी का रावण के श्रेष्ठ भवन पुष्पक विमान तथा रावण के रहने की सुन्दर हवेली को देखकर उसके भीतर सोयी हुई सहस्रों सुन्दरी स्त्रियों का अवलोकन करना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  5.9.71 
न चाकुलीना न च हीनरूपा
नादक्षिणा नानुपचारयुक्ता।
भार्याभवत् तस्य न हीनसत्त्वा
न चापि कान्तस्य न कामनीया॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
रावण की कोई भी पुत्री ऐसी नहीं थी जो उत्तम कुल में उत्पन्न न हुई हो अथवा कुरूप, दुराचारी या विद्याहीन हो, अच्छे वस्त्र, आभूषण, माला आदि से रहित हो, शक्तिहीन हो और अपने प्रियतम को अप्रिय हो ॥71॥
 
Ravana did not have any daughter who was not born in a good family or who was ugly, unruly or skillless, deprived of good clothes, ornaments, garlands etc., powerless and unpleasant to her beloved. 71॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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