श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 9: हनुमान जी का रावण के श्रेष्ठ भवन पुष्पक विमान तथा रावण के रहने की सुन्दर हवेली को देखकर उसके भीतर सोयी हुई सहस्रों सुन्दरी स्त्रियों का अवलोकन करना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  5.9.63 
अन्योन्यभुजसूत्रेण स्त्रीमाला ग्रथिता हि सा।
मालेव ग्रथिता सूत्रे शुशुभे मत्तषट्पदा॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
एक दूसरे की भुजाओं के धागे में गुंथी हुई काले बालों वाली स्त्रियों की वह माला, धागे में पिरोई हुई मदमस्त मधुमक्खियों से भरी हुई फूलों की माला के समान प्रतीत हो रही थी।
 
That garland of women with black hair, entwined in the thread of one another's arms, looked like a garland of flowers filled with intoxicated bees strung on a thread. 63.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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