श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 9: हनुमान जी का रावण के श्रेष्ठ भवन पुष्पक विमान तथा रावण के रहने की सुन्दर हवेली को देखकर उसके भीतर सोयी हुई सहस्रों सुन्दरी स्त्रियों का अवलोकन करना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  5.9.62 
अन्योन्यस्यांगसंस्पर्शात् प्रीयमाणा: सुमध्यमा:।
एकीकृतभुजा: सर्वा: सुषुपुस्तत्र योषित:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
सुन्दर कमर वाली वे सभी युवतियां एक दूसरे से बांहें मिलाये सो रही थीं, एक दूसरे के शरीर के स्पर्श को अपने प्रियतम का स्पर्श समझकर हृदय में उससे आनन्द का अनुभव कर रही थीं।
 
All those young ladies with beautiful waists were sleeping with their arms joined to each other, taking the touch of one another's body as the touch of their beloved and experiencing pleasure from it in their hearts.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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