श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 9: हनुमान जी का रावण के श्रेष्ठ भवन पुष्पक विमान तथा रावण के रहने की सुन्दर हवेली को देखकर उसके भीतर सोयी हुई सहस्रों सुन्दरी स्त्रियों का अवलोकन करना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  5.9.57 
रावणाननशंकाश्च काश्चिद् रावणयोषित:।
मुखानि च सपत्नीनामुपाजिघ्रन् पुन: पुन:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
रावण की कई युवा पत्नियाँ अपनी सह-पत्नियों के चेहरों को बार-बार सूँघकर उन्हें रावण का चेहरा समझ रही थीं। 57.
 
Many of Ravana's young wives were repeatedly smelling the faces of their co-wives, thinking them to be Ravana's face. 57.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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