श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 9: हनुमान जी का रावण के श्रेष्ठ भवन पुष्पक विमान तथा रावण के रहने की सुन्दर हवेली को देखकर उसके भीतर सोयी हुई सहस्रों सुन्दरी स्त्रियों का अवलोकन करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  5.9.52 
मृदुष्वंगेषु कासांचित् कुचाग्रेषु च संस्थिता:।
बभूवुर्भूषणानीव शुभा भूषणराजय:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
कुछ सुन्दरियों के नाजुक शरीर के अंगों और उनके स्तनों के अग्रभाग पर आभूषणों की सुन्दर रेखाएँ नये आभूषणों के समान सुन्दर लगती थीं। 52.
 
The beautiful lines of ornaments on the delicate body parts of some beauties and on the front of their breasts looked as beautiful as new jewellery. 52.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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