श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 9: हनुमान जी का रावण के श्रेष्ठ भवन पुष्पक विमान तथा रावण के रहने की सुन्दर हवेली को देखकर उसके भीतर सोयी हुई सहस्रों सुन्दरी स्त्रियों का अवलोकन करना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.9.49 
अपरासां च वैदूर्या: कादम्बा इव पक्षिण:।
हेमसूत्राणि चान्यासां चक्रवाका इवाभवन्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
अन्य स्त्रियों के वक्षस्थलों पर नीलमणि के हार थे, जो कदम्ब (जालक) नामक पक्षी के समान प्रतीत होते थे, तथा अन्य स्त्रियों के वक्षस्थलों पर स्वर्ण के हार थे, जो चक्रवाक (पुरखव) नामक पक्षी के समान प्रतीत होते थे। 49।
 
The other women had necklaces of sapphire on their breasts, which looked like the birds called Kadamba (Jaalkak), and the other women had necklaces of gold on their breasts, which looked like the birds called Chakravak (Purakhav). 49.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas