श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 9: हनुमान जी का रावण के श्रेष्ठ भवन पुष्पक विमान तथा रावण के रहने की सुन्दर हवेली को देखकर उसके भीतर सोयी हुई सहस्रों सुन्दरी स्त्रियों का अवलोकन करना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.9.46 
मुक्ताहारवृताश्चान्या: काश्चित् प्रस्रस्तवासस:।
व्याविद्धरशनादामा: किशोर्य इव वाहिता:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
कुछ के गले में टूटे हुए मोतियों के हार थे, कुछ के कपड़े फटे हुए थे और कुछ की कमरबंद की ज़ंजीरें टूटी हुई थीं। वे युवतियाँ बोझ ढोते-ढोते थकी हुई नई घोड़ियों जैसी लग रही थीं।
 
Some were covered with broken pearl necklaces, some had their clothes torn off and some had their girdle chains broken. Those young women looked like new female horses, tired from carrying loads.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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