श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 9: हनुमान जी का रावण के श्रेष्ठ भवन पुष्पक विमान तथा रावण के रहने की सुन्दर हवेली को देखकर उसके भीतर सोयी हुई सहस्रों सुन्दरी स्त्रियों का अवलोकन करना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.9.45 
व्यावृत्ततिलका: काश्चित् काश्चिदुदभ्रान्तनूपुरा:।
पार्श्वे गलितहाराश्च काश्चित् परमयोषित:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
कितनों के माथे के सिन्दूर, कस्तूरी आदि के मोती मिट गए थे, कितनों के पैरों से पायल गिर गई थी और कितनों सुन्दरी कन्याओं के हार टूटकर उनके पास पड़े थे ॥45॥
 
The beads of vermilion, musk etc. on the foreheads of some had been wiped off, the anklets of some had fallen off from their feet and the necklaces of some beautiful girls had broken and were lying beside them. ॥ 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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