| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 9: हनुमान जी का रावण के श्रेष्ठ भवन पुष्पक विमान तथा रावण के रहने की सुन्दर हवेली को देखकर उसके भीतर सोयी हुई सहस्रों सुन्दरी स्त्रियों का अवलोकन करना » श्लोक 44 |
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| | | | श्लोक 5.9.44  | व्यावृत्तकचपीनस्रक्प्रकीर्णवरभूषणा:।
पानव्यायामकालेषु निद्रोपहतचेतस:॥ ४४॥ | | | | | | अनुवाद | | मदिरा पीने के पश्चात्, व्यायाम (नृत्य, गायन, वादन आदि) के समय, जिनके केश बिखर गए थे, जिनके हार बिखर गए थे, जिनके सुन्दर आभूषण गिर गए थे, वे सब सुन्दर स्त्रियाँ वहाँ समाधिस्थ होकर सो रही थीं। | | | | After drinking the wine, during exercise (dancing, singing, playing etc.) all those beautiful ladies whose hair had become loose and scattered, whose garlands had become crumpled and whose beautiful ornaments had become loose and fallen here and there, were sleeping there as if in a trance. 44. | | ✨ ai-generated | | |
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