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ramayan 5.7.6: ऐसा लग रहा था जैसे धरती पर सोना बिखरा पड़ा हो। वह अपनी आभा से चमक रहा था। वह एक पर्वत शिखर जैसा लग रहा था, जो अनेक रत्नों से ढका हुआ था, विभिन्न वृक्षों के फूलों से ढका हुआ था और पराग से भरा हुआ था। 6.   |   ramayan सर्ग 5.7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.7.6 
महीतले स्वर्गमिव प्रकीर्णं
श्रिया ज्वलन्तं बहुरत्नकीर्णम्।
नानातरूणां कुसुमावकीर्णं
गिरेरिवाग्रं रजसावकीर्णम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
ऐसा लग रहा था जैसे धरती पर सोना बिखरा पड़ा हो। वह अपनी आभा से चमक रहा था। वह एक पर्वत शिखर जैसा लग रहा था, जो अनेक रत्नों से ढका हुआ था, विभिन्न वृक्षों के फूलों से ढका हुआ था और पराग से भरा हुआ था। 6.
 
It appeared like gold scattered on the earth. It was glowing with its luster. It looked like a mountain peak, covered with numerous gems, covered with flowers of various trees and filled with pollen. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)