Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.7.17: महात्मा हनुमान जी अनेक प्रकार से सदैव अध्यात्म के प्रति समर्पित, निर्मल हृदय, सद्मार्ग पर चलने वाले तथा सद्दृष्टि वाले व्यक्ति थे। जब महात्मा जी बहुत भटकने पर भी जानकी जी को नहीं पा सके, तो वे बहुत दुःखी हुए। | ramayan सर्ग 5.7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महात्मा हनुमान जी अनेक प्रकार से सदैव अध्यात्म के प्रति समर्पित, निर्मल हृदय, सद्मार्ग पर चलने वाले तथा सद्दृष्टि वाले व्यक्ति थे। जब महात्मा जी बहुत भटकने पर भी जानकी जी को नहीं पा सके, तो वे बहुत दुःखी हुए।
Mahatma Hanuman Ji was a person who was always devoted to spirituality in many ways, had a pure heart, followed the right path and had a good vision. When the Mahatma could not find Janaki Ji even after roaming around a lot, he became very sad.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे सप्तम: सर्ग:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें सातवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥