श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.7.14 
नियुज्यमानाश्च गजा: सुहस्ता:
सकेसराश्चोत्पलपत्रहस्ता:।
बभूव देवी च कृतासुहस्ता
लक्ष्मीस्तथा पद्मिनि पद्महस्ता॥ १४॥
 
 
अनुवाद
उस विमान के कमल-दीपित सरोवर में हाथी बने हुए थे, जो लक्ष्मी का अभिषेक कर रहे थे। उनकी सूँड़ें अत्यन्त सुन्दर थीं। उनके शरीर कमलों के केसर से लिपटे हुए थे और उन्होंने अपनी सूँड़ों में कमल पुष्प धारण कर रखे थे। उनके साथ ही वहाँ तेजस्वी देवी लक्ष्मी की मूर्ति भी विराजमान थी, जिसका उन हाथियों द्वारा अभिषेक किया जा रहा था। उनके हाथ अत्यन्त सुन्दर थे। उन्होंने अपने हाथों में कमल पुष्प धारण कर रखे थे॥14॥
 
In the lotus-lit lake of that plane, elephants were made, which were engaged in the anointment of Lakshmi. Their trunks were very beautiful. Their bodies were smeared with saffron from lotuses and they had held lotus flowers in their trunks. Along with them, the idol of the radiant goddess Lakshmi was also seated there, who was being anointed by those elephants. Their hands were very beautiful. They had held lotus flowers in their hands.॥14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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