श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 7: रावण के भवन एवं पुष्पक विमान का वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.7.13 
प्रवालजाम्बूनदपुष्पपक्षा:
सलीलमावर्जितजिह्मपक्षा:।
कामस्य साक्षादिव भान्ति पक्षा:
कृता विहङ्गा: सुमुखा: सुपक्षा:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उस विमान पर सुन्दर मुख और सुन्दर पंखों वाले बहुत से पक्षी उत्पन्न हुए, जो कामदेव के सहायक जान पड़ते थे। उनके पंख मोतियों और सुवर्ण के पुष्पों से सुशोभित थे और वे क्रीड़ापूर्वक अपने घुमावदार पंख मोड़े हुए थे॥13॥
 
On that plane, many birds with beautiful faces and lovely wings were created, who appeared to be the helpers of Kamadeva. Their wings were adorned with flowers made of pearls and gold and they had playfully folded their curved wings.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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