श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.68.9 
त्रयाणामेव भूतानां सागरस्यास्य लङ्घने।
शक्ति: स्याद् वैनतेयस्य वायोर्वा तव चानघ॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे भोले पवनकुमार! इस सागर को पार करने की शक्ति केवल तीन भूतों में ही दिखाई देती है - विनतानंदन गरुड़, वायुदेवता और आप। 9॥
 
Innocent Pawan Kumar! The power to cross this ocean is seen in only three ghosts – Vintanandan Garuda, Vayudevata and you. 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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