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ramayan 5.68.29: जब मैंने मिथिला की पुत्री को मधुर एवं शुभ वचनों से सान्त्वना दी और उसे प्रसन्न किया, तब यद्यपि वह तुम्हारे महान दुःख से अत्यन्त दुःखी थी, तब उसके मन को कुछ शांति मिली।'   |   ramayan सर्ग 5.68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.68.29 
ततो मया वाग्भिरदीनभाषिणी
शिवाभिरिष्टाभिरभिप्रसादिता।
उवाह शान्तिं मम मैथिलात्मजा
तवातिशोकेन तथातिपीडिता॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जब मैंने मिथिला की पुत्री को मधुर एवं शुभ वचनों से सान्त्वना दी और उसे प्रसन्न किया, तब यद्यपि वह तुम्हारे महान दुःख से अत्यन्त दुःखी थी, तब उसके मन को कुछ शांति मिली।'
 
When I consoled the daughter of Mithila with sweet and auspicious words and made her happy, even though she was deeply pained by your great grief, her mind found some peace.'
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे अष्टषष्टितम: सर्ग:॥ ६८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें अड़सठवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ६८॥
॥ सुन्दरकाण्डं सम्पूर्णम् ॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)