श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.68.28 
निवृत्तवनवासं च त्वया सार्धमरिंदमम्।
अभिषिक्तमयोध्यायां क्षिप्रं द्रक्ष्यसि राघवम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तुम्हें शीघ्र ही यह सौभाग्य प्राप्त होगा कि शत्रुओं का नाश करने वाले श्री रघुनाथजी वनवास पूरा करके तुम्हारे साथ अयोध्या चले गए हैं और वहाँ राजा पद पर अभिषिक्त हो गए हैं।॥28॥
 
‘You will soon have the good fortune to see that the destroyer of enemies, Sri Raghunatha, after completing his exile period, has gone with you to Ayodhya and has been anointed as the King there.'॥ 28॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas