श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.68.26 
नखदंष्ट्रायुधान् वीरान् सिंहशार्दूलविक्रमान्।
वानरान् वारणेन्द्राभान् क्षिप्रं द्रक्ष्यसि संगतान्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तुम शीघ्र ही उन वीर वानरों को यहाँ एकत्रित देखोगे, जिनके नख और दाढ़ ही उनके शस्त्र हैं, जो सिंह और व्याघ्र के समान पराक्रमी हैं और जिनके शरीर बड़े-बड़े हाथियों के समान विशाल हैं॥ 26॥
 
You will soon see those valiant monkeys, whose weapons are their nails and molars, who are as valiant as lions and tigers, and whose bodies are as huge as those of large elephants, assembled here.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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