Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.68.21: 'वहाँ बहुत से वानर हैं जो मुझसे श्रेष्ठ और मेरे समान शक्तिशाली हैं। सुग्रीव के यहाँ ऐसा कोई वानर नहीं है जो किसी भी प्रकार मुझसे कमतर हो।'   |   ramayan सर्ग 5.68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.68.21 
मद्विशिष्टाश्च तुल्याश्च सन्ति तत्र वनौकस:।
मत्त: प्रत्यवर: कश्चिन्नास्ति सुग्रीवसंनिधौ॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'वहाँ बहुत से वानर हैं जो मुझसे श्रेष्ठ और मेरे समान शक्तिशाली हैं। सुग्रीव के यहाँ ऐसा कोई वानर नहीं है जो किसी भी प्रकार मुझसे कमतर हो।'
 
‘There are many monkeys there who are better than me and as powerful as me. Sugreeva does not have any monkey who is inferior to me in any way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)