श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.68.17 
देवि हर्यृक्षसैन्यानामीश्वर: प्लवतां वर:।
सुग्रीव: सत्त्वसम्पन्नस्त्वदर्थे कृतनिश्चय:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'देवि! वानरों में श्रेष्ठ तथा वानर-भालुओं की सेना के स्वामी सुग्रीव अत्यन्त बलवान हैं। उन्होंने आपको बचाने का दृढ़ निश्चय कर लिया है॥ 17॥
 
‘Devi! Sugreeva, the best of the apes and the lord of the army of monkeys and bears, is very powerful. He has firmly decided to rescue you.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)