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ramayan 5.68.14: यदि शत्रु सेना का संहार करने वाले और ककुत्स्थ कुल के रत्न श्री राम अपने सैनिकों की सहायता से लंका को रौंद डालें और मुझे अपने साथ ले जाएँ, तो यह उनके योग्य पराक्रम होगा॥14॥   |   ramayan सर्ग 5.68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 68: हनुमान जी का सीता के संदेह और अपने द्वारा उनके निवारण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.68.14 
बलैस्तु संकुलां कृत्वा लङ्कां परबलार्दन:।
मां नयेद् यदि काकुत्स्थस्तत् तस्य सदृशं भवेत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यदि शत्रु सेना का संहार करने वाले और ककुत्स्थ कुल के रत्न श्री राम अपने सैनिकों की सहायता से लंका को रौंद डालें और मुझे अपने साथ ले जाएँ, तो यह उनके योग्य पराक्रम होगा॥14॥
 
If Sri Rama, the destroyer of the enemy's army and the jewel of the Kakutstha clan, tramples Lanka with the help of his soldiers and takes me with him, it would be a feat worthy of his.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)