श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.67.8 
नखाग्रै: केन ते भीरु दारितं वै स्तनान्तरम्।
क: क्रीडति सरोषेण पञ्चवक्त्रेण भोगिना॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भीरु! किसने अपने नखों से तुम्हारी छाती को घायल किया है? कौन क्रोधित पाँच मुख वाले सर्प के साथ खेल रहा है?॥8॥
 
Bhiru! Who has wounded your chest with the tip of his nails? Who is playing with the enraged five-headed serpent?'॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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