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श्लोक 5.67.7  |
तां च दृष्ट्वा महाबाहो दारितां च स्तनान्तरे।
आशीविष इव क्रुद्धस्ततो वाक्यं त्वमूचिवान्॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| महाबाहो! उसकी छाती पर घाव देखकर आप विषैले सर्प के समान क्रोधित हो गए और इस प्रकार बोले-॥7॥ |
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| Mahabaho! Seeing the wound on his chest you became furious like a poisonous serpent and spoke thus -॥ 7॥ |
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