श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.67.6 
वायसेन च तेनैवं सततं बाध्यमानया।
बोधित: किल देव्या त्वं सुखसुप्त: परंतप॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले रघुनन्दन! जब उस कौवे ने आपको इस प्रकार निरंतर पीड़ा दी, तब देवी सीता ने आपको सुखपूर्वक निद्रा से जगा दिया॥6॥
 
O son of Raghunandan, who torments the enemies! When that crow tormented you in this manner continuously, Goddess Sita awakened you from your comfortable sleep.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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