श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.67.43 
इदं च तीव्रं मम शोकवेगं
रक्षोभिरेभि: परिभर्त्सनं च।
ब्रूयास्तु रामस्य गत: समीपं
शिवश्च तेऽध्वास्तु हरिप्रवीर॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे वीर वानरराज! जाकर श्री रामचंद्रजी से मेरा अत्यन्त दुःख कहो और कहो कि ये राक्षस मुझे किस प्रकार डरा-धमका रहे हैं। तुम्हारा मार्ग मंगलमय हो।॥43॥
 
O brave chief of the monkeys! Go and tell Shri Ramchandraji about my intense grief and the way these demons are threatening and intimidating me. May your path be auspicious.'॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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