श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.67.38 
साब्रवीन्मां ततो देवी नैष धर्मो महाकपे।
यत्ते पृष्ठं सिषेवेऽहं स्ववशा हरिपुङ्गव॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर देवी सीता ने मुझसे कहा, 'हे महामुने! हे वानरों के सरदार! मेरे वश में होने पर भी स्वेच्छा से आपकी पीठ का आश्रय लेना मेरा कर्तव्य नहीं है।
 
Hearing this, Goddess Sita said to me, 'O great one! O head of the monkeys! It is not my duty to voluntarily take shelter of your back even when it is within my control.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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