श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  5.67.29-30h 
यत् तु रामो विजानीयादभिज्ञानमनिन्दिते॥ २९॥
प्रीतिसंजननं तस्य प्रदातुं तत् त्वमर्हसि।
 
 
अनुवाद
हे सती-साध्वी देवी! अब आप मुझे कोई ऐसा परिचय दीजिए जो श्री रामचन्द्रजी को ज्ञात हो और जो उनके हृदय को प्रसन्न करे॥ 29 1/2॥
 
O Sati-Sadhvi Devi! Now please give me some identity which is known to Shri Ramchandraji and which will please his heart.॥ 29 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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