श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का भगवान् श्रीराम को सीता का संदेश सुनाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.67.2 
इदमुक्तवती देवी जानकी पुरुषर्षभ।
पूर्ववृत्तमभिज्ञानं चित्रकूटे यथातथम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा - 'पुरुषोत्तम! जानकी देवी ने पहले चित्रकूट में घटी एक घटना को यथार्थ रूप में कहा था। उन्होंने पहचान के लिए उसे इस प्रकार कहा था॥ 2॥
 
He said, 'Purushottam! Janaki Devi had earlier narrated an incident that had happened in Chitrakoot in its true form. She had told it in this manner as a mark of recognition.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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