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श्लोक 5.67.2  |
इदमुक्तवती देवी जानकी पुरुषर्षभ।
पूर्ववृत्तमभिज्ञानं चित्रकूटे यथातथम्॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| उन्होंने कहा - 'पुरुषोत्तम! जानकी देवी ने पहले चित्रकूट में घटी एक घटना को यथार्थ रूप में कहा था। उन्होंने पहचान के लिए उसे इस प्रकार कहा था॥ 2॥ |
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| He said, 'Purushottam! Janaki Devi had earlier narrated an incident that had happened in Chitrakoot in its true form. She had told it in this manner as a mark of recognition.॥ 2॥ |
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