श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.65.19 
एवं मया महाभाग दृष्टा जनकनन्दिनी।
उग्रेण तपसा युक्ता त्वद्भक्त्या पुरुषर्षभ॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे महापुरुष! हे श्रेष्ठ पुरुष! मैंने आपकी भक्ति से प्रेरित होकर जनकनन्दिनी को इस प्रकार घोर तप करते देखा है॥19॥
 
‘O great one! O most excellent man! I have seen Janakanandini performing severe penance in this manner, inspired by your devotion.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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