श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 65: हनुमान जी का श्रीराम को सीता का समाचार सुनाना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  5.65.1-2 
तत: प्रस्रवणं शैलं ते गत्वा चित्रकाननम्।
प्रणम्य शिरसा रामं लक्ष्मणं च महाबलम्॥ १॥
युवराजं पुरस्कृत्य सुग्रीवमभिवाद्य च।
प्रवृत्तिमथ सीताया: प्रवक्तुमुपचक्रमु:॥ २॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् विचित्र कानों से सुशोभित प्रस्रवण पर्वत पर जाकर, राजकुमार अंगद को आगे करके तथा श्री राम, पराक्रमी लक्ष्मण और सुग्रीव को प्रणाम करके, समस्त वानरों ने सीता का समाचार सुनाना आरम्भ किया- 1-2॥
 
Thereafter, going to the Prasravana mountain adorned with strange ears, putting Prince Angad in front and paying obeisance to Shri Ram, mighty Lakshman and Sugriva, all the monkeys started telling the news of Sita - 1-2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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