Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.64.8-9h: हे वानरश्रेष्ठ! मैंने अपनी मूर्खता के कारण पहले जो क्रोध प्रकट किया था, उसे क्षमा कर दीजिए; क्योंकि जैसे आपके पिता पूर्वकाल में वानरों के राजा थे, वैसे ही आप और सुग्रीव भी हैं। आपके अतिरिक्त हमारा स्वामी और कोई नहीं है। 8 1/2॥ | ramayan सर्ग 5.64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मौर्ख्यात् पूर्वं कृतो रोषस्तद् भवान् क्षन्तुमर्हति।
यथैव हि पिता तेऽभूत् पूर्वं हरिगणेश्वर:॥ ८॥
तथा त्वमपि सुग्रीवो नान्यस्तु हरिसत्तम।
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ! मैंने अपनी मूर्खता के कारण पहले जो क्रोध प्रकट किया था, उसे क्षमा कर दीजिए; क्योंकि जैसे आपके पिता पूर्वकाल में वानरों के राजा थे, वैसे ही आप और सुग्रीव भी हैं। आपके अतिरिक्त हमारा स्वामी और कोई नहीं है। 8 1/2॥
O best of the monkeys! Please forgive me for the anger I had shown earlier due to my foolishness; because just as your father was the king of the monkeys in the past, so are you and Sugreeva. Apart from you, no one else is our master. 8 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥