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ramayan 5.64.2: सुग्रीव तथा पराक्रमी रघुवंशी बंधुओं को प्रणाम करके वे वीर वानरों के साथ आकाश मार्ग से उड़ चले।   |   ramayan सर्ग 5.64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 64: दधिमुख से सुग्रीव का संदेश सुनकर अङ्गद-हनुमान् आदि वानरों का किष्किन्धा में पहुँचना और हनमान जी का श्रीराम को प्रणाम करके सीता देवी के दर्शन का समाचार बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.64.2 
स प्रणम्य च सुग्रीवं राघवौ च महाबलौ।
वानरै: सहित: शूरैर्दिवमेवोत्पपात ह॥ २॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव तथा पराक्रमी रघुवंशी बंधुओं को प्रणाम करके वे वीर वानरों के साथ आकाश मार्ग से उड़ चले।
 
After paying obeisance to Sugreeva and the mighty Raghuvanshi brothers, he flew away through the sky along with the valiant monkeys.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)