श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 63: दधिमुख से मधुवन के विध्वंस का समाचार सुनकर सुग्रीव का हनुमान् आदि वानरों की सफलता के विषय में अनुमान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.63.9 
इमे हि संरब्धतरास्तदा तै: सम्प्रधर्षिता:।
निवार्यन्ते वनात् तस्मात् क्रुद्धैर्वानरपुङ्गवै:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'जब रक्षकगण अत्यन्त क्रोधित हो गए, तब उन्होंने उन पर आक्रमण कर दिया। इतना ही नहीं, क्रोध में भरे हुए वानर सरदारों ने रक्षकों को वन से बाहर निकाल दिया॥9॥
 
‘When the protectors became very angry, they attacked them. Not only this, the monkey chiefs filled with anger drove the protectors out of the forest.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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