श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 63: दधिमुख से मधुवन के विध्वंस का समाचार सुनकर सुग्रीव का हनुमान् आदि वानरों की सफलता के विषय में अनुमान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.63.17 
नैषामकृतकार्याणामीदृश: स्याद् व्यतिक्रम:।
वनं यदभिपन्नास्ते साधितं कर्म तद् ध्रुवम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'यह सुनकर मुझे ऐसा लगता है कि जिस काम के लिए वे गए थे, वह उन्होंने अवश्य पूरा कर लिया है। इसीलिए उन्होंने मधुवन पर आक्रमण किया है। यदि वे अपना काम पूरा करके न लौटे होते, तो ऐसा अपराध न करते - मेरे मधुवन को लूटने का साहस न करते॥17॥
 
‘Hearing this, I feel that they have definitely completed the work for which they had gone. That is why they have attacked Madhuvan. If they had not returned after completing their work, they would not have committed such a crime – they would not have dared to loot my Madhuvan.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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