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श्लोक 5.63.14  |
किमयं वानरो राजन् वनप: प्रत्युपस्थित:।
किं चार्थमभिनिर्दिश्य दु:खितो वाक्यमब्रवीत्॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| "राजन्! यह वनरक्षक वानर यहाँ क्यों आया है? और इस दुःख भरी बात में इसने किस ओर संकेत किया है?" |
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| ‘King! Why has this monkey, who protects the forest, come here? And what has he pointed towards in this sad talk?’ |
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