श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 63: दधिमुख से मधुवन के विध्वंस का समाचार सुनकर सुग्रीव का हनुमान् आदि वानरों की सफलता के विषय में अनुमान  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.63.13 
एवं विज्ञाप्यमानं तं सुग्रीवं वानरर्षभम्।
अपृच्छत् तं महाप्राज्ञो लक्ष्मण: परवीरहा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जब मधुवन की लूट का वृत्तांत वानरमुख सुग्रीव को सुनाया जा रहा था, तब शत्रु योद्धाओं का नाश करने वाले परम बुद्धिमान लक्ष्मण ने उनसे पूछा- ॥13॥
 
When the story of the plundering of Madhuvan was being narrated to monkey-headed Sugriva, the most intelligent Lakshmana, the destroyer of enemy warriors, asked him - 13॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas