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श्लोक 5.63.11  |
पाणिभिर्निहता: केचित् केचिज्जानुभिराहता:।
प्रकृष्टाश्च तदा कामं देवमार्गं च दर्शिता:॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| ‘किसी को थप्पड़ मारे गए, किसी को घुटनों से रगड़ा गया, बहुतों को इच्छानुसार घसीटा गया और कितनों को पीठ के बल पटककर आकाश दिखाया गया॥11॥ |
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| ‘Some were slapped, some were rubbed with knees, many were dragged as per their wish and some were thrown on their backs and shown the sky.॥ 11॥ |
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