श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 62: वानरों द्वारा मधुवन के रक्षकों और दधिमुख का पराभव तथा सेवकों सहितदधिमुख का सुग्रीव के पास जाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.62.32 
स वानरानिमान् सर्वान् मधुलुब्धान् गतायुष:।
घातयिष्यति दण्डेन सुग्रीव: ससुहृज्जनान्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मधु के लोभी इन सब वानरों की आयु समाप्त हो गई है। सुग्रीव इन्हें कठोर दंड देकर इनके मित्रों सहित मरवा डालेंगे॥ 32॥
 
‘The lifespan of all these monkeys greedy for honey has come to an end. Sugreeva will punish them severely and get them killed along with their friends.॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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