श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 61: वानरों का मधुवन में जाकर वहाँ के मधु एवं फलों का मनमाना उपभोग करना और वनरक्षक को घसीटना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.61.14 
भक्षयन्त: सुगन्धीनि मूलानि च फलानि च।
जग्मु: प्रहर्षं ते सर्वे बभूवुश्च मदोत्कटा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ के सुगंधित फल और कंद-मूल खाकर वे सब बहुत प्रसन्न हुए। वे सब नशे से उन्मत्त हो गए।
 
They all felt very happy eating the fragrant fruits and roots there. They all became mad with intoxication.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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