श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 61: वानरों का मधुवन में जाकर वहाँ के मधु एवं फलों का मनमाना उपभोग करना और वनरक्षक को घसीटना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.61.10 
ते तद् वनमुपागम्य बभूवु: परमोत्कटा:।
वानरा वानरेन्द्रस्य मन:कान्तं महावनम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजा सुग्रीव के सुन्दर वन में पहुँचकर सब वानर वहाँ का मधु पीने और फल खाने के लिए अत्यंत उत्सुक हो गए॥10॥
 
On reaching the beautiful forest of King Sugreeva, all the monkeys became extremely eager to drink the honey and eat the fruits there.॥10॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas