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ramayan 5.60.12-13: हे वानरों! आओ, हम जनक की कन्या को लेकर श्री राम और लक्ष्मण के बीच में बिठा दें। किष्किन्धा में एकत्रित हुए उन समस्त वानरों को कष्ट देने की क्या आवश्यकता है? आओ, हम लंका जाकर वहाँ के प्रधान राक्षसों का वध करें, और फिर लौटकर श्री राम, लक्ष्मण और सुग्रीव का दर्शन करें।॥12-13॥   |   ramayan सर्ग 5.60: अङ्गद का लङ्का को जीतकर सीता को ले आने का उत्साहपूर्ण विचार और जाम्बवान् के द्वारा उसका निवारण   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.60.12-13 
रामलक्ष्मणयोर्मध्ये न्यस्याम जनकात्मजाम्।
किं व्यलीकैस्तु तान् सर्वान् वानरान् वानरर्षभान्॥ १२॥
वयमेव हि गत्वा तान् हत्वा राक्षसपुङ्गवान्।
राघवं द्रष्टुमर्हाम: सुग्रीवं सहलक्ष्मणम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे वानरों! आओ, हम जनक की कन्या को लेकर श्री राम और लक्ष्मण के बीच में बिठा दें। किष्किन्धा में एकत्रित हुए उन समस्त वानरों को कष्ट देने की क्या आवश्यकता है? आओ, हम लंका जाकर वहाँ के प्रधान राक्षसों का वध करें, और फिर लौटकर श्री राम, लक्ष्मण और सुग्रीव का दर्शन करें।॥12-13॥
 
‘O monkeys! Let us take Janak's daughter and place her between Shri Ram and Lakshman. What is the need to trouble all those monkeys gathered in Kishkinda. Let us go to Lanka and kill the main demons there, and then return and see Shri Ram, Lakshman and Sugreev.'॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)